
Mahashivratri || महाशिवरात्रि पर पूजा कैसे करें ?
महाशिवरात्रि पर शिव पूजा की संपूर्ण सरल विधि (विशेष फलदायी उपाय)
महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन और आध्यात्मिक पर्व है। यह दिन शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा, जप, ध्यान और व्रत से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
प्रातःकाल की तैयारी
महाशिवरात्रि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में, यानी सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन में भगवान शिव का ध्यान करें। इसके पश्चात घर से एक लोटा जल लें, जिसमें थोड़ा गंगाजल मिला हो। साथ ही पूजा की अन्य सामग्री जैसे –
गाय का कच्चा दूध, केसर, या पंचामृत, चावल, काले तिल, फूल, बेलपत्र, धतूरा, एक रुद्राक्ष माला (या घर में उपलब्ध कोई भी माला), एक आसन, दीपक और अगरबत्ती या धूपबत्ती साथ लेकर शिव मंदिर जाएँ।
शिवलिंग पर अभिषेक की विधि
शिव मंदिर पहुँचकर सबसे पहले शिवलिंग के सामने शांत भाव से बैठे।
सबसे पहले एक लोटा जल शिवलिंग पर अर्पित करें। इसके साथ ही नंदी महाराज और वासुकी नाग पर भी थोड़ा जल चढ़ाएँ। इसके बाद पंचामृत या दूध, फिर काले तिल, चावल अर्पित करें। पुनः एक बार जल से अभिषेक करें।
इसके पश्चात बेलपत्र, धतूरा और फूल शिवलिंग पर अर्पित करें। ध्यान रखें कि बेलपत्र हमेशा उल्टा (डंडी आपकी ओर) चढ़ाया जाए। इसके बाद दीपक,धूप-अगरबत्ती जलाएँ।
मनोकामना और जप-ध्यान
पूजा के बाद नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना बहुत ही धीरे और सच्चे मन से कहें। मान्यता है कि नंदी महाराज भगवान शिव तक भक्त की प्रार्थना पहुँचाते हैं।
इसके बाद शिवलिंग के पास आसन लगाकर बैठ जाएँ। आंखें बंद कर कुछ क्षण ध्यान करें और फिर
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का एक माला (108 बार) जप करें।
इसके बाद निम्न मंत्रों का भी एक-एक माला जप करें:
- ॐ गौरीशंकराभ्यां नमः
- ॐ श्री वर्धनाय नमः
इन मंत्रों के जप से वैवाहिक सुख, मानसिक शांति, स्वास्थ्य और जीवन में स्थिरता प्राप्त होती है।
रुद्राक्ष धारण और व्रत का महत्व
यदि आप महाशिवरात्रि के दिन रुद्राक्ष धारण करते हैं, तो यह विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। रुद्राक्ष भगवान शिव का प्रिय आभूषण है और इसे धारण करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
इस दिन महाशिवरात्रि का व्रत रखना भी अत्यंत पुण्यदायी होता है। व्रत रखने से आत्मसंयम बढ़ता है, मन शुद्ध होता है और शिव कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। फलाहार या निर्जल व्रत, अपनी क्षमता के अनुसार किया जा सकता है।
महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण का अवसर है। यदि श्रद्धा, नियम और सच्चे मन से शिव पूजा की जाए, तो भगवान शिव अपने भक्तों की हर मनोकामना अवश्य पूर्ण करते हैं।
“भोलेनाथ” भाव के भूखे हैं — विधि से अधिक भावना महत्वपूर्ण है।
ॐ नमः शिवाय🙏
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