कर्म करना कितना ज़रूरी है ? || Karma

Karma

मनुष्य के जीवन में कर्म का विशेष महत्व है। जीवन में जो कुछ भी हम प्राप्त करते हैं, वह हमारे कर्मों का ही परिणाम होता है। केवल सोचने, चाहने या भाग्य पर भरोसा करने से सफलता नहीं मिलती, बल्कि सही दिशा में किए गए कर्म ही जीवन को आगे बढ़ाते हैं। इसलिए कहा गया है—“कर्म किए बिना फल की कल्पना भी व्यर्थ है।”

कर्म का अर्थ केवल मेहनत करना नहीं, बल्कि सही सोच, सही उद्देश्य और ईमानदारी से किया गया प्रयास है। हर व्यक्ति अपने जीवन का निर्माता स्वयं होता है और उसके कर्म ही उसका भविष्य तय करते हैं। जो व्यक्ति कर्म में विश्वास रखता है, वह कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता।

भाग्य का सहारा लेकर बैठ जाना मनुष्य को निष्क्रिय बना देता है। जो लोग हर बात को किस्मत पर छोड़ देते हैं, वे अवसरों को खो देते हैं। इसके विपरीत, कर्मशील व्यक्ति हर स्थिति में कुछ न कुछ करने का रास्ता निकाल ही लेता है। इतिहास गवाह है कि महान व्यक्तियों ने अपने कर्मों से ही अपनी पहचान बनाई है।

कर्म करने से आत्मविश्वास बढ़ता है। जब हम प्रयास करते हैं, तो हमें अपनी क्षमताओं का एहसास होता है। असफलता भी कर्म का ही एक हिस्सा है, जो हमें अनुभव और सीख देती है। जो व्यक्ति गिरकर फिर से उठता है, वही आगे चलकर सफलता का स्वाद चखता है।

जीवन में लक्ष्य प्राप्त करने के लिए निरंतर कर्म आवश्यक है। बिना प्रयास के कोई भी लक्ष्य पूरा नहीं होता। विद्यार्थी पढ़ाई से, किसान खेती से और व्यापारी अपने परिश्रम से ही आगे बढ़ता है। हर क्षेत्र में सफलता का एक ही मंत्र है—लगातार कर्म।

कर्म हमें सही और गलत के बीच फर्क करना सिखाता है। जब हम अच्छे कर्म करते हैं, तो समाज में सम्मान प्राप्त होता है और मन को शांति मिलती है। बुरे कर्म भले ही तुरंत परिणाम न दिखाएँ, लेकिन उनका प्रभाव देर-सवेर अवश्य सामने आता है।

कर्म केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी होना चाहिए। निस्वार्थ भाव से किया गया कर्म समाज को बेहतर बनाता है। जब हम किसी की मदद करते हैं या ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाते हैं, तो वह भी श्रेष्ठ कर्म की श्रेणी में आता है।

श्रीमद्भगवद्गीता में भी कर्म को प्रधान माना गया है। उसमें कहा गया है कि मनुष्य को फल की चिंता किए बिना कर्म करते रहना चाहिए। फल अपने समय पर अवश्य मिलता है, लेकिन कर्म के बिना कुछ भी संभव नहीं है।

निष्कर्ष

कर्म ही जीवन की असली पूंजी है। जो व्यक्ति कर्म को अपनाता है, वही जीवन में आगे बढ़ता है। भाग्य पर भरोसा करना गलत नहीं, लेकिन कर्म के बिना भाग्य भी साथ नहीं देता। इसलिए हर परिस्थिति में प्रयास करते रहना ही सच्ची सफलता की कुंजी है।

“कर्म करते रहो, सफलता स्वयं रास्ता बना लेगी।”

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