Digital Love
प्रेम… एक ऐसा शब्द, जो जितना आसान सुनाई देता है, उतना ही गहरा और रहस्यमय है। यह एक ऐसी भावना है जो इंसान को भीतर तक छू लेती है। मगर आज के समय में प्रेम पहले जैसा नहीं रहा। अब यह केवल दिलों का रिश्ता नहीं, बल्कि डिजिटल स्क्रीन और सोशल मीडिया के एल्गोरिदम से जुड़ा एक खेल बन गया है।
कहते हैं, “जितना किसी चीज़ के पीछे भागो, वह उतनी दूर चली जाती है।” यही बात प्रेम पर भी लागू होती है। जब हम किसी को पाने की कोशिश में अपने भावनाओं का पीछा करने लगते हैं, तो वह एहसास हमसे और भी दूर चला जाता है। शायद इसलिए कि प्रेम कभी मजबूरी से नहीं, बल्कि सहजता से पनपता है।
लेकिन आज का दौर अलग है। अकेलापन और उम्र का दबाव हमें धीरे-धीरे भीतर से कमजोर करने लगता है। जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, हमें लगता है कि अब हमारे पास कोई नहीं है जो हमें समझे, सुने या हमारे साथ कुछ पल बिताए। और जब यह एहसास गहराता है, तब हम प्रेम को ढूँढ़ने निकल पड़ते हैं — कहीं किसी मुस्कुराते चेहरे में, किसी कहानी में या किसी वीडियो के छोटे से क्लिप में।
यही वह जगह है जहाँ डिजिटल दुनिया हमें जकड़ लेती है।
एक बार अगर आपने प्यार, इश्क़ या रिश्तों से जुड़ी कोई वीडियो देखी, तो फ़ोन का algorithm आपको बार-बार वैसी ही चीज़ें दिखाने लगता है। धीरे-धीरे, आप एक ऐसी दुनिया में फँस जाते हैं जहाँ हर चीज़ आपको यही याद दिलाती है कि आपको भी किसी की ज़रूरत है।
वो algorithm आपकी सोच, आपकी भावनाएँ, और कभी-कभी आपका आत्मविश्वास तक बदल देता है। अब आप उस डिजिटल दुनिया में इतने खो जाते हैं कि प्यार पाना ही आपकी ज़िंदगी का मकसद बन जाता है।
पर असली सवाल यह है — क्या यह सच में प्रेम है? // Digital Love
या यह बस एक डिजिटल भ्रम है जो हमें अकेलेपन से बचाने के लिए बनाया गया है?
प्रेम अपने आप में कोई गलती नहीं है। यह तो जीवन का सबसे सुंदर एहसास है। पर समस्या तब शुरू होती है जब हम किसी कल्पना में खोकर अपना वर्तमान और अपनी शांति खो देते हैं।
हम सोचते हैं कि किसी को पा लेने से सब ठीक हो जाएगा — लेकिन सच्चाई यह है कि जब तक हम खुद को समझना नहीं सीखते, खुद से प्रेम नहीं करते, तब तक कोई और हमें समझ ही नहीं सकता।
आज की सबसे बड़ी ज़रूरत शायद यह नहीं है कि हम किसी और को ढूँढ़ें, बल्कि यह है कि हम खुद को जानें।
अपने अकेलेपन को महसूस करें, उससे भागें नहीं।
अपने सपनों को जिएँ, अपने अंदर के खालीपन को अपने ही प्रयासों से भरें — न कि किसी के आने का इंतज़ार करके।
क्योंकि जो इंसान खुद से प्रेम करना जानता है, वही किसी और को सच्चे अर्थों में प्रेम दे सकता है।
इसलिए अगली बार जब आप स्क्रीन पर कोई रोमांटिक रील देखें, तो खुद से एक सवाल ज़रूर पूछिए —
“क्या मैं सच में प्रेम ढूँढ़ रहा हूँ, या बस एल्गोरिदम मुझे प्रेम के भ्रम में रखे हुए है?”
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Disclaimer:
हमने आपको ऊपर जो भी बात बताई है या जो भी लिखा है उसका उदेश्य किसी की भावनाओ को ठेस पहुँचाना नहीं है।
हमने आपको ऊपर जो भी बात बताई है या जो भी लिखा है उसका उदेश्य किसी को सुनाना नहीं है।
हमने जो कुछ भी बताया उसको बस दिल से लिखा है ताकि आपको हमारी बात पसंद आए।