जीवन में छोटी-छोटी चीज़ों की कद्र क्यों ज़रूरी है। || Appreciation

Appreciation

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में इंसान हमेशा किसी बड़ी उपलब्धि के पीछे दौड़ता रहता है। बड़ा घर, बड़ा नाम, बड़ी सफलता—यही सब कुछ मान लिया गया है। इस दौड़ में हम यह भूल जाते हैं कि जीवन केवल बड़ी मंज़िलों का नाम नहीं है, बल्कि उन छोटे-छोटे पलों का संगम है जो रोज़ हमारे सामने आते हैं। विडंबना यह है कि हम जिन बड़ी खुशियों का इंतज़ार करते रहते हैं, उनकी नींव उन्हीं छोटी-छोटी चीज़ों से बनती है, जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

छोटी-छोटी चीज़ों की कद्र करना हमें वर्तमान में जीना सिखाता है। अक्सर इंसान या तो बीते कल के पछतावे में उलझा रहता है या आने वाले कल की चिंता में डूबा रहता है। ऐसे में आज का दिन बस कट जाता है। लेकिन जब हम सुबह की ठंडी हवा, एक कप चाय, किसी अपने की मुस्कान या बिना वजह मिले सुकून को महसूस करना सीखते हैं, तब हमें एहसास होता है कि जीवन अभी भी सुंदर है। वर्तमान को महसूस करना ही असली जीवन जीना है।

छोटी खुशियों की अनदेखी धीरे-धीरे इंसान को असंतुष्ट बना देती है। जब हम हर खुशी को किसी बड़ी उपलब्धि से जोड़ देते हैं, तब हमारा मन कभी संतुष्ट नहीं हो पाता। एक लक्ष्य पूरा होता है, तो दूसरा सामने खड़ा हो जाता है। इस अंतहीन चाह में इंसान थक जाता है। वहीं जो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों में खुशी ढूँढना सीख लेता है, वह कम में भी संतुलन और संतोष महसूस करता है। संतोष जीवन को हल्का बनाता है और मन को स्थिर करता है।

छोटी चीज़ों की कद्र रिश्तों को भी गहराई देती है। आज रिश्तों में अक्सर शिकायतें ज़्यादा और सराहना कम देखने को मिलती है। हम सामने वाले की कमियों पर ध्यान देते हैं, लेकिन उसके छोटे प्रयासों को अनदेखा कर देते हैं। एक साधारण-सा हालचाल पूछना, बिना वजह किया गया छोटा-सा सहयोग, या मुश्किल समय में चुपचाप दिया गया साथ—ये सब रिश्तों की असली ताक़त होते हैं। जब हम इन छोटी बातों की अहमियत समझते हैं, तब रिश्ते बोझ नहीं, सहारा बन जाते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी छोटी-छोटी चीज़ों की कद्र करना बेहद ज़रूरी है। जो इंसान हर समय बड़ी अपेक्षाओं के दबाव में रहता है, वह तनाव और निराशा का शिकार हो जाता है। लेकिन जब वह रोज़ के छोटे सुखों को स्वीकार करता है, तब उसका मन हल्का रहता है। वह हर दिन में कुछ अच्छा खोज लेता है, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों। यही आदत इंसान को अंदर से मज़बूत बनाती है।

जीवन की सच्चाई यह है कि बड़ी खुशियाँ कभी-कभी आती हैं, लेकिन छोटी खुशियाँ हर दिन हमारे आसपास मौजूद रहती हैं। फर्क सिर्फ नज़र का होता है। जो व्यक्ति छोटी-छोटी चीज़ों की कद्र करना सीख लेता है, वह जीवन को शिकायतों की बजाय कृतज्ञता के साथ जीता है। और कृतज्ञता वही भावना है, जो इंसान को भीतर से समृद्ध बनाती है।

अंत में यही कहा जा सकता है कि जीवन को बेहतर बनाने के लिए हालात बदलना हमेशा ज़रूरी नहीं होता, बल्कि नज़रिया बदलना ज़रूरी होता है। जब हम छोटी-छोटी चीज़ों को महत्व देना शुरू कर देते हैं, तब जीवन अपने आप बड़ा, गहरा और सुंदर लगने लगता है।

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