जहाँ चाह है वहाँ राह है।
जीवन में सफलता पाने के लिए केवल संसाधनों या परिस्थितियों का होना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सबसे ज़रूरी होती है इंसान की चाह। चाह यानी कुछ कर दिखाने की तीव्र इच्छा, अपने लक्ष्य को पाने की दृढ़ लगन और हर हाल में आगे बढ़ने का जज़्बा। जब किसी व्यक्ति के भीतर सच्ची चाह जन्म लेती है, तब रास्ते अपने आप बनने लगते हैं। इसीलिए कहा गया है — जहाँ चाह है, वहाँ राह है।
अक्सर हम देखते हैं कि लोग अपने असफल होने का कारण हालात को मानते हैं। कोई कहता है कि परिवार का साथ नहीं मिला, कोई कहता है कि पैसे की कमी थी, तो कोई समय को दोष देता है। लेकिन सच यह है कि इतिहास में जितने भी सफल लोग हुए हैं, उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में ही अपने सपनों को साकार किया है। उनके पास संसाधन कम थे, लेकिन चाह अपार थी। यही चाह उन्हें हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देती रही।
चाह इंसान को मेहनत करना सिखाती है। बिना चाह के की गई मेहनत बोझ लगती है, लेकिन जब दिल से चाह होती है, तो वही मेहनत आनंद बन जाती है। जो इंसान अपने लक्ष्य को लेकर गंभीर होता है, वह असफलताओं से डरता नहीं, बल्कि उनसे सीखता है। हर गिरावट उसके लिए एक सबक बन जाती है और हर असफल प्रयास उसे मंज़िल के और करीब ले जाता है।
जीवन की राह कभी भी सीधी नहीं होती। रास्ते में रुकावटें, संघर्ष और निराशा आती ही हैं। कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि इंसान टूटने लगता है। लेकिन जिस व्यक्ति के भीतर चाह ज़िंदा रहती है, वह हार मानने के बजाय नया रास्ता खोज लेता है। चाह इंसान की सोच को सकारात्मक बनाती है और उसे यह विश्वास दिलाती है कि हर समस्या का कोई न कोई समाधान ज़रूर होता है।
चाह इंसान को डर से ऊपर उठना सिखाती है। असफलता का डर, समाज का डर और लोगों की बातें अक्सर हमें आगे बढ़ने से रोकती हैं। लेकिन जब चाह मज़बूत होती है, तो ये डर छोटे लगने लगते हैं। तब इंसान यह समझ जाता है कि कोशिश करना हार से बेहतर है। क्योंकि जो कोशिश करता है, वही आगे बढ़ता है।
आज के समय में जब प्रतिस्पर्धा बहुत ज़्यादा है, तब चाह का महत्व और भी बढ़ जाता है। पढ़ाई हो, नौकरी हो, व्यापार हो या जीवन का कोई और लक्ष्य — बिना चाह के सफलता संभव नहीं है। चाह इंसान को अनुशासन, धैर्य और आत्मविश्वास सिखाती है। यही गुण किसी भी व्यक्ति को साधारण से असाधारण बना देते हैं।
अंततः यही कहा जा सकता है कि जीवन में जो लोग अपनी चाह को मरने नहीं देते, वही आगे चलकर अपनी अलग पहचान बनाते हैं। हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इंसान के भीतर सच्ची चाह हो, तो रास्ते अपने आप निकल आते हैं। इसलिए कभी भी अपनी चाह को कमजोर मत पड़ने दो, क्योंकि सच में जहाँ चाह है, वहाँ राह है।
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