Talking
आज के समय में बोलना बहुत आसान हो गया है। हर किसी के पास अपनी राय है, अपना मंच है और अपनी बात रखने का मौका है। सोशल मीडिया से लेकर आम बातचीत तक, हर जगह शब्दों की भीड़ दिखाई देती है। लेकिन इस शोर के बीच एक बात धीरे-धीरे भूलती जा रही है—कम बोलना भी एक समझदारी है।
कम बोलने का मतलब यह नहीं कि इंसान के पास कहने को कुछ नहीं है। इसका मतलब होता है कि वह सोच-समझकर बोलना जानता है। जो व्यक्ति हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया नहीं देता, वह अक्सर गलतियों से बच जाता है। शब्द एक बार निकल जाएँ तो वापस नहीं आते, लेकिन चुप्पी इंसान को खुद को संभालने का समय देती है।
अक्सर लोग खुद को साबित करने के लिए ज़्यादा बोलते हैं। वे हर बहस में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं, हर चर्चा में अपनी राय थोपना चाहते हैं। लेकिन समझदार इंसान जानता है कि हर जगह बोलना ज़रूरी नहीं होता। कई बार शांत रहना ही सबसे मजबूत जवाब होता है।
कम बोलना इंसान को सुनना सिखाता है। जब हम कम बोलते हैं, तब हम सामने वाले को समझने का मौका देते हैं। सुनने की यह आदत रिश्तों में गहराई लाती है। बहुत से झगड़े सिर्फ इसलिए होते हैं क्योंकि लोग सुनने से ज़्यादा बोलने में लगे रहते हैं।
भावनात्मक रूप से भी कम बोलना बहुत फायदेमंद होता है। ग़ुस्से, दुख या तनाव में बोले गए शब्द अक्सर बाद में पछतावे का कारण बनते हैं। लेकिन जो व्यक्ति चुप रहना जानता है, वह अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना सीखता है। यही नियंत्रण उसे मानसिक रूप से मज़बूत बनाता है।
कम बोलने से इंसान का आत्मसम्मान भी झलकता है। उसे हर किसी की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होती। वह जानता है कि उसकी पहचान उसके शब्दों से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और कर्मों से बनती है। ऐसे लोग बिना शोर किए भी अपनी जगह बना लेते हैं।
आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में जहाँ हर कोई अपनी बात मनवाने में लगा है, वहाँ कम बोलने वाला इंसान अलग नज़र आता है। उसकी शांति लोगों को आकर्षित करती है। वह नकारात्मकता से दूरी बनाए रखता है और अपनी ऊर्जा सही जगह लगाता है।
कम बोलना रिश्तों को भी बचाता है। हर बात का जवाब देना, हर मतभेद को बहस में बदल देना रिश्तों को कमजोर कर देता है। लेकिन जब इंसान चुप रहकर सही समय का इंतज़ार करता है, तब कई समस्याएँ अपने-आप हल हो जाती हैं।
यह भी सच है कि चुप्पी हमेशा आसान नहीं होती। कई बार लोग चुप रहने को कमजोरी समझ लेते हैं। लेकिन असल में चुप रहना साहस का काम है। यह दिखाता है कि इंसान खुद पर नियंत्रण रखता है और हालात के अनुसार खुद को ढाल सकता है।
अंत में यही कहा जा सकता है कि कम बोलना मतलब खुद को दबाना नहीं, बल्कि खुद को समझना है। यह एक ऐसी कला है जो इंसान को संतुलित, शांत और समझदार बनाती है। शब्दों की दुनिया में चुप्पी की कीमत बहुत बड़ी है—बस उसे समझने की ज़रूरत है।
Talking || Talking || Talking
Read Now 👉 “काबिल हो? तो फिर रुके क्यों हो!” || Start Now
Read Now 👉 वैदिक ज्योतिष और लाल किताब में अंतर || Difference Between Vedic or Lal Kitab
Read Now 👉 कुंडली भाग्य नहीं, दिशा दिखाती है।
Read Now 👉 “शादी वो रिश्ता है जहां ‘मैं’ नहीं, सिर्फ ‘हम’ होता है”
यदि आप कोई भी पूजा करवाना चाहते हो या अपनी कुंडली के बारे में जानना चाहते हो या अपनी कुंडली के हिसाब से कोई पूजा करवाना चाहते हो तो आप हमारे Astrologer (Astro Ronak Shukla) से संपंर्क कर सकते हो। संपर्क करने के लिए यहाँ क्लीक करे 👉 Click Here
Disclaimer:
हमने आपको ऊपर जो भी बात बताई है या जो भी लिखा है उसका उदेश्य किसी की भावनाओ को ठेस पहुँचाना नहीं है।
हमने आपको ऊपर जो भी बात बताई है या जो भी लिखा है उसका उदेश्य किसी को सुनाना नहीं है।
हमने जो कुछ भी बताया उसको बस दिल से लिखा है ताकि आपको हमारी बात पसंद आए।