जल ही जीवन है।
पानी प्रकृति का वह उपहार है, जो बिना किसी भेदभाव के हर जीव को जीवन देता है। इंसान हो, पशु हो या पेड़–पौधे, सभी का अस्तित्व पानी पर ही टिका हुआ है। हम रोज़मर्रा की जिंदगी में पानी का उपयोग इतने सामान्य तरीके से करते हैं कि कई बार हमें इसकी असली कीमत का एहसास ही नहीं हो पाता। पर सच यही है कि अगर पानी न हो, तो जीवन भी संभव नहीं। यही कारण है कि प्राचीन समय से लेकर आज तक “जल ही जीवन है।” को एक अनमोल सत्य माना गया है।
हमारा शरीर भी लगभग सत्तर प्रतिशत पानी से बना है। प्यास लगने पर शरीर हमें संकेत देता है कि इसकी जरूरत है। पानी हमारे शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है, पाचन ठीक करता है और हर अंग को सक्रिय बनाता है। अगर पानी की कमी हो जाए, तो शरीर बीमार होने लगता है। इसलिए प्रतिदिन पर्याप्त पानी पीना केवल आदत नहीं, बल्कि हमारी ज़रूरत है।
लेकिन दुख की बात है कि दुनिया का केवल एक छोटा सा हिस्सा पीने योग्य पानी है। पृथ्वी पर जितना पानी दिखता है, उसका अधिकांश समुद्रों में खारा है। हमारे लिए उपयोगी ताज़ा पानी बहुत कम है, और वह भी दिन–प्रतिदिन कम होता जा रहा है। बढ़ती आबादी, ग्लोबल वॉर्मिंग, प्रदूषण और जल बर्बादी जैसे कारण हमारे भविष्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर रहे हैं।
ध्यान से सोचिए—अगर नदियाँ सूख जाएँ, बारिश कम हो जाए, या पानी इतना कम हो जाए कि हमें हर बूंद संभालकर खर्च करनी पड़े, तो हमारा जीवन कितना कठिन हो जाएगा। खेती रुक जाएगी, उद्योग बंद हो जाएंगे और पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा। इसलिए पानी बचाना हमारी अपनी जिम्मेदारी है। अगर हम आज ध्यान नहीं देंगे, तो आने वाली पीढ़ियाँ पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस सकती हैं।
पानी बचाना कठिन नहीं है। बस थोड़ी सी जागरूकता ही काफी है। नल को अनावश्यक खुला न छोड़ें, पानी को प्रदूषित न करें, घर में पानी का पुन: उपयोग करें, वर्षा जल संचयन अपनाएँ और पेड़-पौधे लगाएँ। यह छोटे-छोटे कदम मिलकर भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
अंत में यही कहा जा सकता है कि पानी की हर बूंद अनमोल है। यह सिर्फ प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन की नींव है। इसलिए इसे बचाना न केवल हमारी जरूरत है, बल्कि हमारा कर्तव्य भी है। याद रखिए — “जल है तो कल है।” जल ही जीवन है। जल ही जीवन है। जल ही जीवन है। जल ही जीवन है। याद रखिए।
Read Now 👉 “काबिल हो? तो फिर रुके क्यों हो!” || Start Now
Read Now 👉 वैदिक ज्योतिष और लाल किताब में अंतर || Difference Between Vedic or Lal Kitab
Read Now 👉 कुंडली भाग्य नहीं, दिशा दिखाती है।
Read Now 👉 “शादी वो रिश्ता है जहां ‘मैं’ नहीं, सिर्फ ‘हम’ होता है”
यदि आप कोई भी पूजा करवाना चाहते हो या अपनी कुंडली के बारे में जानना चाहते हो या अपनी कुंडली के हिसाब से कोई पूजा करवाना चाहते हो तो आप हमारे Astrologer (Astro Ronak Shukla) से संपंर्क कर सकते हो। संपर्क करने के लिए यहाँ क्लीक करे 👉 Click Here
Disclaimer:
हमने आपको ऊपर जो भी बात बताई है या जो भी लिखा है उसका उदेश्य किसी की भावनाओ को ठेस पहुँचाना नहीं है।
हमने आपको ऊपर जो भी बात बताई है या जो भी लिखा है उसका उदेश्य किसी को सुनाना नहीं है।
हमने जो कुछ भी बताया उसको बस दिल से लिखा है ताकि आपको हमारी बात पसंद आए।