वैदिक ज्योतिष और लाल किताब में अंतर || Difference Between Vedic or Lal Kitab

Difference Between Vedic or Lal Kitab || Vedic vs Lal Kitab || Vedic or Lal Kitab Me Kya Antar Hai

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Difference Between Vedic or Lal Kitab

वैदिक ज्योतिष और लाल किताब का विस्तृत अंतर: इतिहास से लेकर उपाय तक पूरा सच

Difference Between Vedic or Lal Kitab

ज्योतिष विद्या भारत की सबसे प्राचीन और गहन विद्या मानी जाती है। लेकिन इसके अंदर भी कई पद्धतियाँ विकसित हुई हैं, जिनमें दो सबसे प्रसिद्ध हैं – वैदिक ज्योतिष और लाल किताब
बहुत से लोग इन दोनों को एक जैसा समझते हैं, जबकि सच यह है कि इनका ढांचा, गणना, प्रभाव, दर्शन और उपाय एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।

यह लेख उन सभी लोगों के लिए है जो इन दोनों प्रणालियों का गहरा, वास्तविक और व्यावहारिक अंतर जानना चाहते हैं।
चलिए शुरुआत करते हैं।

🔶 1. उत्पत्ति व इतिहास (Origin & History)

📌 वैदिक ज्योतिष

  • इसकी उत्पत्ति ऋग्वेद और वेदांग ज्योतिष में बताई जाती है।
  • महर्षि पराशर, जेमिनी, वराहमिहिर—इन महान ज्योतिषाचार्यों ने इसे विकसित किया।
  • लगभग 5,000 से 8,000 वर्ष पुरानी प्रणाली मानी जाती है।
  • इसमें ग्रह, नक्षत्र, दशा, गोचर, विभाजन कुंडली — सब कुछ शामिल होता है।

📌 लाल किताब

  • लाल किताब का इतिहास आधुनिक है।
  • इसे 1939 से 1952 के बीच “Pt. Rupchand Joshi” ने लिखा।
  • शुरुआत पाकिस्तान (तब अविभाजित भारत) के मुल्तान क्षेत्र से हुई।
  • यह “Astro-Palmistry” (हस्तरेखा + कुंडली) का संयुक्त रूप माना जाता है।
  • लाल किताब को “उपाय प्रधान” ज्योतिष कहा जाता है।

🔶 2. कुंडली निर्माण में अंतर (Chart Construction System)

वैदिक कुंडली कैसे बनती है?

  • जन्म तारीख
  • जन्म समय (सेकण्ड तक का अंतर मायने रखता है)
  • जन्म स्थान
  • नक्षत्र, लग्न, ग्रहों की डिग्री, नाड़ी, आयनांश सबकी गणना होती है

इसमें उपयोग होता है:

  • लाहिरी आयनांश
  • लग्न (Ascendant)
  • राशी (Signs)
  • नक्षत्र (27 Nakshatra, 9 Charan)
  • वर्ग कुंडलियाँ (D-1, D-9, D-10, D-60)

लाल किताब की कुंडली कैसे बनती है?

  • लाल किताब में हाउस फिक्स (House Fixed) होते हैं —
    मतलब पहला घर हमेशा वही, दूसरा घर वही…
  • ग्रहों की डिग्री, दृष्टियाँ, नक्षत्र—almost महत्वहीन माने जाते हैं।
  • केवल यह देखा जाता है: ग्रह किस घर में बैठा है।

उदाहरण:

वैदिक में
3° का मंगल, बृहस्पति की 9वीं दृष्टि, नक्षत्र—सब मायने रखते हैं

लाल किताब में
मंगल = जिस घर में बैठा है → वही परिणाम

🔶 3. दृष्टि सिद्धांत (Planetary Aspects)

वैदिक ज्योतिष

हर ग्रह की निश्चित दृष्टि होती है:

  • सूर्य/चंद्र/शुक्र/बुध: 7वीं दृष्टि
  • मंगल: 4, 7, 8
  • गुरु: 5, 7, 9
  • शनि: 3, 7, 10
  • राहु/केतु: 5, 7, 9 (कई मतों में)

लाल किताब

  • ग्रहों की दृष्टि का कोई निश्चित नियम नहीं।
  • मात्र घर में बैठे ग्रह का व्यवहार देखा जाता है।
  • लाल किताब कहती है कि ग्रह “घर” का मालिक जैसा बन जाता है।

🔶 4. दशा और गोचर (Timing System)

वैदिक ज्योतिष

  • सबसे महत्वपूर्ण भाग — विम्शोत्तरी दशा
  • दशा + अंतरदशा + प्रत्यंतर = घटना का समय

उदाहरण

  • मंगल महादशा में शादी
  • शनि अंतरदशा में नौकरी समस्या
  • गुरु महादशा में शिक्षा सफलता

लाल किताब

  • लाल किताब में कोई “दशा प्रणाली” नहीं।
  • परिणाम ग्रह के घर में बैठने से तय हैं।
  • समय निर्धारण उपायों और ग्रह की “सोई/जगाई” स्थिति पर आधारित।

🔶 5. उपाय प्रणाली (Remedies System)

यह सबसे बड़ा अंतर है।

वैदिक ज्योतिष उपाय

  • मंत्र जाप (जैसे महामृत्युंजय, गायत्री)
  • रत्न धारण
  • होम/यज्ञ
  • पितृ पूजा
  • ग्रह शांति
  • दान

ये उपाय “कर्म सिद्धांत” पर आधारित होते हैं और दीर्घकालिक होते हैं।

लाल किताब उपाय

  • बेहद सरल और रोजमर्रा की चीज़ों से
  • जैसे:
    • गेहूँ बहाना
    • सिक्का फेंकना
    • कोवा खिलाना
    • झाड़ू दान
    • गुड़ बहाना
    • लाल कपड़ा देना
  • जल्दी असर देने वाले माने जाते हैं
  • लेकिन गलत उपाय भारी नुकसान पहुंचा सकता है

लाल किताब सीधे कहती है:
“उपाय वही जो ग्रह को जगाए नहीं, शांत करे।”

🔶 6. भविष्यवाणी का तरीका

वैदिक ज्योतिष कैसे भविष्य बताता है?

  • ग्रह + भाव + दृष्टि + नक्षत्र + योग + दशा + गोचर
    इन सभी की संयुक्त गणना से सटीक भविष्यवाणी।

यह “वैज्ञानिक, गणितीय और पारंपरिक” पद्धति है।

लाल किताब कैसे भविष्य बताती है?

  • ग्रह किस घर में बैठा है
  • ग्रह सोया है या जागा हुआ
  • ग्रह मालिक जैसा व्यवहार कर रहा है या नौकर जैसा
  • ग्रह किससे दोस्ती/दुश्मनी दिखा रहा है

यह “व्यावहारिक और सरल” ज्योतिष है।

🔶 7. सटीकता का अंतर (Accuracy Difference)

प्रणालीसटीकता
वैदिक ज्योतिषगहरी गणना, इसलिए दीर्घकालिक घटनाओं में अत्यंत सटीक
लाल किताबव्यवहार, अचानक बदलाव, आर्थिक उतार-चढ़ाव में सटीक

दोनों उपयोगी हैं— बस तरीके अलग हैं।

🔶 8. कहाँ उपयोग करें? (Where to Use)

वैदिक ज्योतिष उचित है जब:

  • विवाह मेल
  • व्यवसाय सफलता
  • करियर भविष्य
  • दीर्घकालिक जीवन पथ
  • रोग, ऋण, आयु
  • ग्रह योगों की गहराई समझनी हो

लाल किताब उचित है जब:

  • त्वरित परिणाम चाहिए
  • व्यवहार/आर्थिक समस्या हो
  • ग्रह बहुत खराब कर रहा हो
  • घर में लगातार अड़चनें आ रही हों
  • साधारण और बिना खर्च के उपाय चाहिए

🔶 9. फायदे व नुकसान (Pros & Cons)

वैदिक ज्योतिष

फायदे
✔ अत्यंत सटीक
✔ विज्ञान और गणना आधारित
✔ दीर्घकालिक जीवन दर्शन देता है

नुकसान
✘ समझना कठिन
✘ उपाय महंगे और समय लेने वाले

लाल किताब

फायदे
✔ आसान
✔ कम खर्चीले उपाय
✔ व्यवहारिक और तुरंत असर

नुकसान
✘ गलत उपाय नुकसान दे सकता है
✘ ग्रहों की गहराई को नहीं छूता
✘ समय निर्धारण इतना मजबूत नहीं

🔶 10. निष्कर्ष: कौन बेहतर है?

दोनों महान हैं—
लेकिन दोनों की दिशा और दर्शन अलग है।

👉 वैदिक ज्योतिष = गहराई + विज्ञान + लंबी अवधि का सत्य
👉 लाल किताब = सरलता + उपाय + त्वरित परिणाम

एक “शास्त्र” है, दूसरा “अनुभव आधारित उपाय प्रणाली”।

सही ज्योतिषी दोनों को मिलाकर सबसे सटीक भविष्यवाणी कर सकता है।

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इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य ज्योतिषीय अध्ययन और पारंपरिक अनुभव पर आधारित है। वैदिक ज्योतिष और लाल किताब दोनों पद्धतियों के सिद्धांत, उपाय और परिणाम व्यक्तियों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं। किसी भी ज्योतिषीय उपाय को अपनाने से पहले योग्य ज्योतिषी की सलाह लेना आवश्यक है। इस ब्लॉग का उद्देश्य केवल ज्ञान साझा करना है, न कि किसी प्रकार की निश्चित भविष्यवाणी, चिकित्सा सलाह, आर्थिक निर्णय या व्यक्तिगत जीवन-निर्णयों की गारंटी देना। लेख में दिए गए उपायों का पालन पूरी तरह पाठक की अपनी इच्छा और जिम्मेदारी पर होगा।

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इस लेख से किसी को सुनाना, या किसी चीज का अपमान करना, या कोई चीज को Compare करना ऐसा उद्देश्य बिल्कुल भी नहीं है। इस लेख को एक लेख के रूप में ही देखे।

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