“कम करो पर कमाल करो!”

कम करो पर कमाल करो

हम सब अपनी 20’s में दौड़ते हुए रहते हैं—कभी करियर के पीछे, कभी सीखने के पीछे, कभी खुद को साबित करने के पीछे। और इसी भागदौड़ में हमें ऐसा लगता है कि मल्टीटास्किंग ही सफलता की चाबी है।
4–5 साल पहले मैं भी यही मानता था। मुझे लगता था कि अगर मुझे सब कुछ आ गया—editing, designing, writing, business, art—तो जिंदगी आसान हो जाएगी। क्योंकि हर जगह यही सुनने को मिलता था—
“आज की दुनिया में सब कुछ आना चाहिए”,
“Multitasking is the future”,
“अगर तुम एक ही चीज़ करते रहोगे तो पीछे रह जाओगे।”

लेकिन असलियत बिल्कुल उलटी निकली।

🌱 मेरी आँख खुली… सिर्फ कुछ दिन पहले

इतने सालों तक मैं मल्टीटास्किंग के पल्ले से लटका रहा।
एक काम कर रहा हूँ तो दिमाग दूसरे में, दूसरा कर रहा हूँ तो तीसरा सिर पर।
और सबसे खतरनाक—फ़ोन के रील्स भी कभी मल्टीटास्किंग को सही बताते थे, और कभी उसके बिल्कुल उलट।
जैसे ब्रह्मांड मेरे सामने दोनों रास्ते रख रहा हो—
लेकिन मैंने गलत वाला पकड़ लिया।

फिर पिछले कुछ दिनों में कुछ बदल गया।
मैंने देखा कि हर दिन हम कुछ न कुछ सीखते हैं।
और असली सीख यह थी कि हम इंसान हैं, मशीन नहीं।
हमें ज़रूरी नहीं कि सब कुछ आए।
हमें सिर्फ उस एक चीज़ को रोज practice करनी है जिसमें हम सच में अच्छे बन सकते हैं।

🥋 ब्रूस ली की एक लाइन ने मेरी सोच बदल दी

मैंने एक बात सुनी थी, लेकिन सालों तक उसे “महसूस” नहीं कर पाया:

“I fear not the man who has practiced 10,000 kicks once,
but I fear the man who has practiced one kick 10,000 times.” — Bruce Lee

यह लाइन मुझे पहले भी दिखती थी, रील्स में भी मिली थी।
लेकिन असली मतलब मेरी जिंदगी में तब आया जब मैंने इसे अपने ऊपर लागू किया।

आज जब मैं एक ही चीज़ को रोज़ करता हूँ—
रुकावटें आती हैं…
कभी मन नहीं करता…
कभी ऊपर से मल्टीटास्किंग का पुराना ख्याल भी खींचता है…
लेकिन फिर भी, मैं एक ही दिशा में मेहनत कर रहा हूँ।
और नतीजे भी दिखने लगे हैं—धीरे-धीरे, शांत तरीके से, पर बहुत गहरे।

🎯 सच यह है:

आप हर चीज़ में अच्छे नहीं हो सकते।
लेकिन एक चीज़ में आप दुनिया को हिला सकते हैं।

जब आप एक ही कौशल को रोज़ निखारते हैं—
आप गहराई सीखते हैं, स्पीड बढ़ती है, confidence आता है, identity बनती है।
और सबसे ज़रूरी—
आपके अंदर की clarity बढ़ती है।

💡 तो आज मेरे लिए नए जीवन का नया मंत्र यही है:

“Focus is powerful.
Being good at one thing is more valuable than being average at many.”

शायद आपको लगे कि मैं exaggerate कर रहा हूँ…
या शायद आपको मुझ पर भरोसा न हो,
क्योंकि आप भी अभी किसी और पलड़े में अटके होंगे—
मल्टीटास्किंग वाले, comparison वाले, confusion वाले…
लेकिन जब आप खुद यह अनुभव करेंगे,
जब एक ही चीज़ में महारत की ताकत महसूस करेंगे,
तब आपको भी यही लगेगा—
सादगी ही सफलता है।
फ़ोकस ही शक्ति है।
महारत ही जीत है।

🌟 अंत में:

इस दुनिया में सब कुछ करना ज़रूरी नहीं है।
ज़िंदगी एक मैराथन है—100 मीटर रेस नहीं।
और इस लंबी दौड़ में वही जीतता है
जो एक दिशा चुनकर, उसी पर चलता रहता है।

अगर आप भी आज किसी काम को लेकर उलझे हैं,
किसी दो रास्तों में फंसे हैं,
तो खुद से सिर्फ एक सवाल पूछिए:

“मैं किस चीज़ में 1,000 बार practice कर सकता हूँ?”

वही आपका future है।
वही आपकी ताकत है।
वही आपकी जीत है।

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